विजयादशमी पर मोहन भागवत ने भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों के बारे में चेतावनी दी। इसके जवाब में विपक्ष ने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर बल दिया, जबकि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने भागवत का समर्थन जताया।