मिर्जापुर की डिम्पी पंडित के रूप में मशहूर हर्षिता गौर ने बताया कि दशहरा उनके लिए सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि बचपन की यादों से जुड़ा है। दिल्ली में बड़े रावण के पुतले और परिवार के साथ रावण दहन देखने का अनुभव उन्हें खास लगता है। उन्होंने स्कूल और सोसायटी के मैदान में सीता का नाटक भी किया था।